Archive | दिसम्बर 2011

नए साल में करंट

विद्युत के मामले में सरप्लस छत्तीसगढ़ के रहवासियों को नए साल में बिजली जोर का झटका देने वाली है. दुखद पहलु यह है कि किसानों को 5 एचपी के पम्प कनेक्शन को साल में 6 हजार यूनिट मुफ्त देने का ढ़िढ़ोरा पिटने वाली प्रदेश सरकार किसानों को भी राहत नहीं दे रही है. 8 माह पहले ही (अप्रैल) यहां विद्युत की नई दर लागू की गई है. तब औसतन 14 फीसदी की वृध्दि की गई थी, जिसमें 22 फीसदी घरेलु और 13 फीसदी गैर घरेलु श्रेणी में बढ़ोत्तरी की गई थी.
एक तरफ प्रदेश सरकार अपनी प्रगति और विकास की गाथा कहती है, तो दूसरी तरफ आम व्यक्ति से लेकर उद्योगपतियों और किसानों को बर्बाद करने पर तूली हुई है. अनेक उद्योगपति छत्तीसगढ़ में इसीलिए उद्योग लगाने से कतराते हैं. इसी का परिणाम है कि अनेक स्टील उद्योगपति अपनी फैक्ट्री के शटर डाउन करने मजबूर हो रहे हैं.
एक तरफ विद्युत मंडल अनेक बड़ी हस्तियों से विद्युत की वसूली नहीं कर पा रहा है और जो पूरी इमानदारी से प्रति माह बिजली बिल का भुगतान कर रहे हैं, उन पर ही गाज गिराने की तैयारी पूर्ण हो गई है. इस प्रदेश के किसान नहर-नाली के अभाव में एक फसली उपज ले रे हैं, उन्हें सुविधाएं तो मुहैया नहीं करायी जा रही है उपर से विद्युत बिल अनाप-शनाप बढ़ाया जा रहा है. किसान इससे हैरान-परेशान हो आत्महत्या करने मजबूर हो रहे हैं, तो आम नागरिक दो पाटन के बीच पीस रहा है. अवैध कनेक्शन और विद्युत की चोरी करने वालों पर विद्युत विभाग की नीति चौपट है. हमारे सुस्त कृषि मंत्री चन्द्र शेखर साहू किसानों की हित की बात कर लड़ाई लड़ने की बात कह रहे हैं, वे इस दिशा में कुछ नहीं कर पायेंगे. वे सिर्फ बयान दे रहे है क्योंकि उनकी अपने विभाग में सही पकड़ नहीं है.

अच्छी फसल के लिए बलि

जादू-टोना कर मरवाने की धमकी से बचने 7 वर्षीया मासूम ललिता ताती की सिर्फ इसलिए बलि चढ़ा दी गई कि इससे फसल अच्छी होगी. यह खुलासा तब हुआ, जब इस बच्ची के लापता होने की जानकारी पुलिस को हुई और पूछताछ के बाद जिन दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, तो उन्होंने बताया कि लाश कहां है. लाश क्षत-विक्षत अवस्था में थी और शरीर के सारे अंग गायब थे. इन आरोपियों ने तूरनार तालाब के पास स्थित मंदिर में ललिता ताती का कलेजा निकाल कर चढ़ाया था.
आज के युग में इस तरह की घटनाएं महं अंदर तक झकझोर देती है, पर अभी भी लुके-छिपे तौर पर यह सब हो रहा है और ना जाने कब तक होता रहेगा. अंधविश्वास और शिक्षा के अभाव में आपसी रंजीश को छिपाने किसी मासूम की बलि देना क्या जायज है?
छत्तीसगढ़ के बस्तर के बीजापुर में यह सनसनीखेज मामला सामने आया है. तूरनार निवासी इग्नेश कुजूर एवं जेलबाड़ा निवासी पदम सुक्कु का 4 माह पूर्व ललिता के पिता बुधराम के साथ शूकर के मांस को लेकर झगड़ा हुआ था. तभी से बदला लेने की योजना बनी और नरबलि देकर अच्छी फसल की उम्मीद की गई. एक पंथ दो काज के तहत पहले ललिता का अपहरण किया गया पश्चात इस बच्ची का गला घोंट कर हत्या कर दी गई. पूजा-अर्चना की गई और ललिता के मृत शरीर को क्षत-विक्षत कर उससे कलेजा निकाला गया और देवी को अर्पण कर दिया गया.

गैर जरूरी मुहावरा

अन्ना हजारे और उनकी टीम के पीछे लाखों लोगों का हूजूम है. वे खुद को गांधीवादी बताते हैं, पर इन दिनों अपनी जुबान पर लगाम नहीं दे पा रहे हैं. उन्होंने देश की महिलाओं का अपमान किया है. उन्होंने बांद्रा कुर्ला काम्पलेक्स ग्राउंड में अपनी बात सही तरीके से समझाने के लिए एक मुहावरे का इस्तेमाल किया- मुहावरा है–
बांझ क्या जाने प्रसुति की वेदना
इस मुहावरे को सुनने के बाद अनेक महिलाओं, महिला संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. वकील और महिला डिटेक्टिव फैलेविया एग्निस ने कहा है कि अन्ना को सार्वजनिक मंच पर इस तरह का दुखद अ‍ैर गैर जरूरी मुहावरा इस्तेमाल नहीं करना था. जब वे ये बात कह रहे थे, तब वहां ऐसी महिलाएं भी रही होंगी, जिनकी कोई संतान नहीं है अ‍ैर मातृत्व सुख से वंचित होंगी. इस बात को वहां उपस्थित महिलाएं ही नहीं बल्कि टीवी पर भी अनगिनत महिलाओं ने सुना. क्या अपनी बात को समझाने के लिए उन्हें इस तरह के मुहावरों का प्रयोग करना चाहिए? क्या यह समस्त महिलाओं का अपमान नहीं है? क्या महिलाएं उन्हें सहज माफ करने को तैयार हैं? क्या वे देश् भर की महिलाओं से माफी मांगेंगे? क्या उनकी टीम की प्रमुख किरण बेदी, मेधा पाटकर जैसी महिलाओं का ध्यान इस ओर नहीं गया? क्या उन्होंने अन्ना को इस बात की जानकारी नहीं दी?

हम परदेश में हैं हमें क्या पता?

रायपुर नगर पालिका निगम लोन लेकर मुआवजा देने के पक्ष में नहीं है इसलिए प्रॉपर्टी टैक्स समेत अन्य टैक्स लेने के बाद भी लोगों की बात सुनने को तैयार नहीं हे. तोड़-फोड़ से प्रभावित लोगों के पास दस्तावेज है, जिनकी निगम अनदेखी कर रहा है. अब डंगनिया में निगम अपनी जबरिया कार्यवाही को वैध करार करने की कवायद में जुट गया है.
इस काम में जितने दोषी नगरीय निकाय मंत्री हैं उतने ही दोषी महापौर है. इनके इशारे पर इस कार्यवाही को अंजाम दिया गया. वे यह आदेश देकर आस्ट्रेलिया रवाना हो गई कि लोगों को जवाब देते बनेगा कि मैं तो यहां थी ही नहीं मुझे कुछ भी नहीं मालूम.
आपको बता दूं कि वे लगातार निगम के अपने चमचों से वार्तालाप कर रही हैं. वे जान रही हैं कि यहां क्या-क्या हो रहा है. वे उन लोगों से भी बात कर रही हैं, जिनसे यह पता लगाया जा सके कि तोड़-फोड़ के बाद लोगों की क्या प्रतिक्रिया है. उनसे जब इस विषय में बात होती है, तो अपनी हंसी नहीं रोक पा रही हैं. जब उनसे कहा जाता है कि जिनके घर टूटे हैं, वे रो रहे हैं, तब वे गंभीरता का लबादा ओड़ने की कोशिश करती हैं.
अब वे विधायक बनने का सपना देख रही हैं. वे अभी से इस दिशा में अपने काम को आगे ले जा रही हैं. खुदा ना खासता यदि उन्हें विधायक की टिकिट मिल गई और वे विजयी हो गई तो पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश में  ना जाने कहां-कहां तोड़-फोड़ करवा दें. उन्हें शहर में गंदगी नहीं दिख रही है. दिख रहा है तो सिर्फ वो हिस्सा, जहां निम्न- निम्न मध्यम वर्ग के लोग निवासरत हैं. क्या आप ऐसे दोहरे चरित्र के इंसान को अपना वोट देकर अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने के लिए तैयार हैं? इन्हें अच्छे से पहचान लें, ये वही महिला हैं, जिसने हाथ जोड़ कर आपसे एक बार विजयी बनाने की अपील की थी. अब इनकी अगले बार चुनाव के समय अपील को नकार देना क्योंकि जो एक शहर को हिला कर रख दी हैं, उन्हें यदि टिकिट मिल गई तो पूरे प्रदेश को तहस-नहस करने में कोई कोर-कसर नहीं रखेंगी और आप सिर्फ और सिर्फ दुखी होने के कुछ भी नहीं कर पायेंगे.

आशियाना उजाड़ने वाले को पहचानें

डंगनिया में बुधवार की सुबह रायपुर नगर पालिका निगम ने बेरहमी से आशियाने उजाड़ दिए. कलयुग के भ्रष्ट राजा ने प्रजा की सादगी का भरपुर दोहन कर दिया. नगरीय प्रशासन मंत्री ने बड़ी सफाई से अपना काम कर दिया है. सड़क चौड़ीकरण के नाम पर उन घरों को मुंह अंधेरे में चोड़ दिया गया, जहां पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोग रहते आये हैं. इनके पास अपने मकान के सभी दस्तावेज हैं, पर मंत्री ने जहां हाथ रख कर इसका सफाया करने का आदेश दे दिया, तो फिर किसी कानून का आप सहारा ले लें आपके हाथ खाली ही रहेंगे.
ये वो मंत्री हैं, जो छत्तीसगढ़ को चमाचम करने के सपने देख रहे हैं और नींद में सोये लोगों के सपनों को तोड़ रहे हैं. वे कल रात 31 दिसम्बर को नये साल के आगमन का जश्न मनायेंगे क्योंकि उन्होंने एक सड़क के चौड़ीकरण का रास्ता साफ करने 40 मकानों और उसमें रहने, आजीविका चलाने वाले अनेक लोगों को वहां खड़ा कर दिया है, जहां से उनके घर के बुजुर्गो ने अपने खुद के घर का सपना देखा था. अब वे उन सामानों को देख-देख कर दुखी हो रहे हैं, जो उनके जीवन का हिस्सा बन चुके थे.
किसी के आशियाने को जो कानूनन वैध है, तोड़ कर अपनी जमीन खड़े करने वालों को क्या आप सबक नहीं सिखायेंगे? क्या आप अपने दर्द से कराहते रहेंगे? क्या आप इन खुशी मनाने वाले नेता की आॅँखें नहीं खोलेंगे? क्या वह आपके सीने को बार-बार छलनी करे और आप उसे सिर्फ झेलते रहेंगे? नहीं जागो, संभलो और गहन विचार करो. समझो, परदे के पीछे से किस तरह एक मंत्री ने आपको कठपुतली की तरह नचाया है?

पहचानें और सबक सीखायें

ये छत्तीसगढ़ के संस्कृति मंत्री हैं. इन दिनों इनके पैर में मामुली फ्रेक्चर आया है. वे लगातार उनसे मिलने आ रहे नेताओं-मंत्रियों के साथ फोटो खींचा कर अखबार का काफी हिस्सा किल कर रहे हैं, क्योंकि आमजनता को उनके इस फोटो सहित समाचार में कोई रूचि नहीं है. ये वो मंत्री हैं, जो स्थानी लोक कलाकारों की हमेशा उपेक्षा करते हैं और किसी भी कार्यक्रम में बॉलीवुड के कलाकारों को आमंत्रित कर भीड़ इक्टठी करते हैं. इनके लिए उन्हें करोड़ों रूपये खर्च करने पड़े उसकी उन्हें कोई परवाह नहीं, लेकिन छत्तीसगढ़ के लोक कलाकारों को वे उस समय मंच प्रदान करते हैं, जब लोगों की भीड़ नहीं पहुंची होती. वे इन कलाकारों को इतने कम पैसों में मंच पर स्थान दिलाते हैं कि एक आत्म सम्मानीय कलाकार खुद के बल-बुते पर अपनी कला का प्रदर्शन कर लेना ज्यादा अच्छा समझता है.
पहचाने इस नेता को जो चुनाव के समय इन कलाकारों को किसी वागन में अपने चुनाव क्षेत्र में लगातार प्रचार करने के लिए इस्तेमाल करते हैं और विजयी होते ही इन्हें भूल जाते हैं. ये वही नेता हैं, जिन्हें जोशी बहनों के आशियाना उजड़ने की जानकारी है, पर संवेदना प्रकट करने के लिए वक्च नहीं.
इन्हें अच्छे से पहचान लें. 2 वर्ष बाद ये आपके घरों में दस्तक देंगे, तब इन्हें अतिथि समझ कर सत्कार मत करना. इन्हें अपने अधिकार का उपयोग करते हुए वोट मत देना. नया वर्ष आने वाला है और हम सभी कोई ना कोई प्रण करते हैं तो शपथ लें कि इन्हें चुनाव में हमें वोट नहीं देना है.

ससुराल गेंदा फूल… के आशियाने को रौंदा

सास गारी देवे, ननद चुटकी लेवे…ससुराल गेंदा फूल … यह गाना जैसे ही  बॉलीवुड की एक फिल्म में आया, लोगों की जुबा पर चढ़ गया. क्या बॉलीवुड हस्तियां क्या टीवी कलाकार लगभग सभी ने इस गाने पर ढुमके लगाये. तब छत्तीसगढ़ का नाम सुर्खियों में आया और लोगों ने जोशी बहनों को पहचानना शुरू किया. ये वही बहनें हैं, जिनकी आवाज में यह गाना हम सुनते हैं और पसंद करते हैं. छत्तीसगढ़ में तो यह गाना इतना लोकप्रिय हुआ कि लोगों ने अपने मोबाइल का कॉलर ट्यून की तरह सहेज कर रखा. मेरे मोबाइल में आज भी यह कॉलर ट्यून है.
जोशी बहनें डा. रेखा, प्रभा और शीला जोशी लोक गीत के लिए समर्पित हैं. इनके पिता स्वर्गीय विष्णुदत्त जोशी ने सन् 1960 में डंगनिया में अपना आशियाना बनाया. यह वही घर है, जहां राज्य भर के कलाकार साधना करने आते हैं और इस घर के एक हिस्से में यह बहनें रहती हैं जबकि घर के बाकि हिस्से को राज्य भर के कलाकारों के रियाज तथा ठहरने का ठिकाना बनाया गया है. ये वही विष्णुदत्त जोशी हैं जिनके लिखे गीत चोला माटी के राम… ने लोगों के दिलों में घर बना लिया. इन कला को समर्पित बहनों के घर को निगम के दस्ते ने ढहा दिया. कला की साधना के मंदिर के ढहाये जाने पर किसी का मन नहीं पसीजा.
इस परिवार के रमादत्त जोशी का कहना है कि हमने निगम कार्यालय में घर के सभी दस्तावेज दमा कराये थे, पर मुंह अंधेरे यह दस्ता आया और हमारे मंदिर को तहस-नहस कर चला गया. इन बहनों का आत्मविश्वास अभी भी डगमगाया नहीं है- वे कहती हैं तोड़फोड़ के बाद बची जगह पर फिर तिनका-तिनका जोड़ कर कलाकारों के लिए आशियाना खड़ा करेंगे. शाबाश जोशी बहनें. हमें आप पर नाज है, पर दुख इस बात का है कि अब तक किसी नेता ने इन बहनों की सुध नहीं ली है.
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