लोकपाल का दायरा

प्रधानमंत्री के लोकपाल में शामिल होने पर तीन विकल्प सुझाए गए हैं लोकपाल के दायरे में लेकिन सुरक्षा के प्रावधानों के साथ, लोकपाल के दायरे में लेकिन अभियोजन प्रक्रिया पद छोड़ने के बाद ही, लोकपाल के दायरे से बाहर.
सिटीजन्स चार्टर और नागरिकों की शिकायत दूर करने की प्रणाली लोकपाल के दायरे में ना हो और उसे भी संवैधानिक दर्जा मिले.
न्यायपालिका लोकपाल के दायरे से बाहर होगी, उसके लिए एक अलग राष्ट्रीय न्यायपालिका आयोग बनाया जाए.
संसद की परिधि में सांसदों के व्यवहार और आचार पर पहले से ही संविधान में नियम होने की वजह से, उसे लोकपाल से बाहर रखा जाए.
मीडिया, निजी कंपनियां और गैर-सरकारी संगठन भी लोकपाल के दायरे से बाहर होंगे. लेकिन दस लाख से ज्यादा आर्थिक मदद पाने वाले बड़े स्वयंसेवी संगठन इसके दायरे में होंगे.
कैसे होगी कार्रवाई?
भ्रष्टाचार की शिकायतों पर कार्रवाई में सीबीआई, सीवीसी और लोकपाल तीनों की भूमिका होगी.
शिकायत सबसे पहले एक शुरुआती जांच के लिए लोकपाल के पास जाएगी. शिकायत को सही जानने पर लोकपाल इसकी तहकÞीकÞात के लिए इसे सीबीआई के पास भेजेगा.
किसी भी मामले की जांच के दौरान सीबीआई की संबंधित मंत्रालय और लोकपाल के प्रति कोई जवाबदेही नहीं होगी.
सीबीआई की जांच के बाद ये लोकपाल की अभियोजन शाखा के पास जाएगी. जो इसे सजा की प्रक्रिया के लिए विशेष अदालत के पास भेजेगी.विभागीय जांच के लिए ‘ए’ एवं ‘बी’ वर्ग के सरकारी मुलाजिमों के खÞिलाफ शिकायतों पर लोकपाल के सुझाव बाध्यकारी होंगे (अगर तीन राज्य मंत्री इसका विरोध ना करें तो).
‘सी’ वर्ग के सरकारी मुलाजिमों के खÞिलाफ शिकायतें मुख्य सतर्कता आयोग (सीवीसी) देखेगा. आयोग हर तीन महीने में इसकी रिपोर्ट लोकपाल को देगा.
व्हिसलब्लोअर यानि पर्दाफश करनेवालों पर और फोन-टैपिंग जैसे मुद्दों पर मौजूदा प्रावधान ही लोकपाल पर भी लागू होंगे.
लोकपाल को झूठी शिकायत करने पर दी जाने वाली सज को कम किया गया है.
कÞनून बनने की प्रक्रिया
पिछले करीब ढाई महीनों में स्थाई समिति में 14 राजनीतिक पार्टियों के 30 सदस्यों ने 24 मुद्दों पर चर्चा की जिनमें से 13 मुद्दों पर पूर्ण सहमति थी.
इस रिपोर्ट पर अब मंत्रिमंडल चर्चा करेगा. मंत्रिमंडल को रिपोर्ट में दिए गए किसी भी प्रस्ताव को नामंजर करने की छूट होगी.
माने गए प्रस्तावों के साथ संसद में पहले ही पेश हो चुके लोकपाल विधेयक में संशोधन किए जाएंगे और मंत्रिमंडल द्वारा उसे दोबारा सदन के पटल पर रखा जाएगा.
जिसके बाद संसद उसपर मतदान कर लोकपाल कानून बनाएगा.
रिपोर्ट के प्रमुख प्रस्ताव
लोकपाल को संवैधानिक दर्जा
कार्रवाई के लिए लोकपाल को कोई पूर्व-अनुमति की जरूरत नहीं
कार्रवाई में सीबीआई, सीवीसी और लोकपाल तीनों की भूमिका
जांच के दौरान सीबीआई कि सरकार और लोकपाल के प्रति जवाबदेही नहीं
प्रधानमंत्री के लोकपाल के दायरे में होने का फैसला संसद पर
न्यायपालिका, मीडिया, निजी कंपनियां दायरे में नहीं
सांसदों का आचरण लोकपाल के दायरे में नहीं
सिटिजÞन चार्टर को अलग संवैधानिक दर्जा
लोकपाल और लोकायुक्तों के लिए एक कानून
चयन समिति का एक सदस्य सीवीसी, सीईसी और यूपीएससी अध्यक्ष द्वारा नामांकित

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