हादसा

इस कहानी को लिखने की प्रेरणा अभी घटी एक रेल दुर्घटना से मिली, जिसमें तीन दोस्त स्कूल नहीं जाकर रेल पटरी में मोबाइल में गाना सुनने के दौरान रेलगाड़ी के अचानक आ जाने से बे-मौत मारे गये और उनका एक दोस्त इस हादसे का गवाह बन गया. मुझे लगा कि जो बच्चा इस दुर्घटना का शिकार होने से बच गया यदि वह इससे सबक ले तो गंभीरता से अध्ययन कर अपनी मंजील पा सकता है.
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आज हमें यह बताने में गर्व हो रहा है कि गणेश ने न केवल इंजीनियरिंग में टॉप किया है बल्कि उन्हें देश की नामी कंपनी ने नौकरी का आॅफर दिया है. हमें प्रसंनता होगी यदि आप सभी से अपने निजी विचारों से गणेशजी अवगत कराये. धन्यवाद.
दर्शक दीर्धा में बैठा गणेश हड़बड़ा कर उठ खड़ा हुआ और मंच में पहुंच कर माइक संभालते हुए कहने लगा- मेरे पास कहने को वैसे तो कुछ भी नहीं है, पर एक बात आप सभी से शेयर करना चाहूंगा कि किसी भी चीज को हल्के से ना लें क्योंकि उसे पाने के लिए जिद होनी चाहिए. आपके रास्ते में अनेक विपदाएं आनी है. जो इसे पार कर गया वह विजेता बनेगा. मेरे इस मुकाम तक पहुंचने की एक छोटी सी कहानी है, जिसकी वजह से मेरी सोच में बदलाव आया और मुझे अपनी गल्तियों का अहसास हुआ. मैं ना केवल अपने गुरूजनों का अपमान कर रहा था बल्कि अपने माता-पिता और परिवार के सदस्यों के साथ धोखा कर रहा था. मैं मध्यम वर्गीय परिवार से हूं. मेरे पिता सरकारी नौकरी में हैं. परिवार हमारा भरा-पूरा है इस वजह से एक पिता की तन्ख्वाह से घर चलाना थोड़ा कठिन होता है, पर मेरी मां ने जिस कुशलता से घर के खर्चों को कम कर हम भाई-बहनों की पढ़ाई में लगने वाले खर्च के लिए रूपये इकट्ठे किए और कभी भी हमें यह भान नहीं होने दिया कि वे किल तरह से परिवार के खान-पान की व्यवस्था करती रही.
मैं विस्तार में नहीं जाना चाहूंगा. जिस परिवर्तन से मेरी पढ़ाई में रूचि बढ़ी वह कुछ इस तरह है- जिस सरकारी क्वाटर्रस में मेरा बचपन गुजरा वहां मेरे स्कूल में पढ़ने वाले दो साथी थे. छोटे थे खेलने-कूदने में बड़ा मजा आता था. स्कूल में टीचर जो होमवर्क देते थे उसे अक्सर नहीं बनाते थे और पास ही के रेल पटरी में क्लास छोड़कर दोड़ लगाया करते थे. मेरे एक दोस्त के पास मोबाइल था. वह था तो उसके पापा का,  पर वह अपने पापा से जिद कर अपने पास ही रखता था. और लोगों को मोबाइल में गाना सुनते देख  उसने अपने पॉकेट मनी से हेडफोन खरीद लिया था जिसे वह स्कूल बैग में छिपा कर रखता था.
होमवर्क नहीं करने के कारण हम तीनों दोस्त पिछले दो दिनों से स्कूल नहीं जाकर रेल पटरी के पास बैठ कर उस मोबाइल पर गाना सुना करते और लंच बे्रक के समय अपना-अपना टिफिन खा मटर-गस्ती करते रहते. शाम होते ही घर लौट जाते. तीसरे दिन जब हम रेलवे पटरी पर दौड़ लगा रहे थे तो मेरे दोस्त ने कहा कि गणेश तुम घड़ी में देखों हम दोनों में कौन तेज दौड़ लगाता है. में काफी थका हुआ था. मौंने हामी भर दी. वे दोनों दौड़ने के लिए तैयार थे तभी एक दोस्त ने कहा यार दौड़ते समय हम दोनों एक-एक कान में इसे लगा गाना सुनते हुए दौड़ते हैं. वे दौड़ लगाना शुरू किये पर एसा संभव नहीं हुआ. रेस लगाने की बात अगले दिन के लिए चाल दिया गया और तय हुआ कि मेरा जो दूसरा दोस्त था वह भी अपने बड़े भाई का मोबाइल लेकर आयेगा और दोनों गाना सुनते हुए दौड़ लगायेंगे.
अगले दिन दोनों पूरी तैयारी से आये थे. वे अपना-अपना मोबाइल हाफ पेंट की जेब में रख गाना सुनते हुए दौड़ने लगे. मेरी निगाह घड़ी की सुई पर टिकी हुई थी. तभी मुझे आभास हुआ कि ट्रेन आ रही है. मैं घबरा गया. मैंने जोर से चिल्ला कर उन्हें बताया कि पटरी पर ट्रेन है. पर दौड़ने उसमें जीतने और गाने की तेज आवाज के कारण उन्ग्हें मेरी बात समझ में नहीं आयी. पास से गुजर रहे कुछ लोगों ने भी उन्हे सचेत किया पर वे अपनी धून में थे. मेरी आॅखों के सामने मेरे दो दोस्त मुझसे हमेशा-हमेशा के लिए बिछड़ गये.
इस घटना ने मेरे जीवन के मायने बदल कर रख दिए. मुझे यह लगने लगा कि इसका सबसे बड़ा दोषी मैं हूं. मैंने अपने दोस्तों के परिवार को दुखी किया था. अपने घरवालों की अ‍ॅखों में धुल झोंका था. घर पहुचने पर मुझे किसी ने कुछ नहीं कहा. मैं इस घटना के बाद गुमसुम सा रहने लगा. इत्तफाक से पापा का तबादला हो गया और हम नये शहर में आ गये. नये दोस्त बने. उनकी अच्छी संगत मिली और मैंने खुद से भी उस हादसे के बाद प्रण किया था कि कभी भी खुद को धोखा नहीं देना है. अब मेरा पूरा ध्यान सिर्फ पढ़ाई में रहने लगा. एक बार जब दसवीं में टॉपर बना तो पढ़ने का जूनून सवार हो गया.
आज मेरे वे दोस्त तो नहीं रहे पर उस हादसे ने मेरी दुनिया ही बदल कर रख दी.

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One response to “हादसा”

  1. Khilesh says :

    सच कहा आपने गंभीरता से अध्ययन करते तो ये नौबत नही आती ।

    बहोत अच्छे लिखते हो आप ।

    ऐसे हि लिख्ते रहीयेगां ।

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