ठंड में गरम जल से नहाते हैं महाकाल!

ठंड के दिनों में भगवान महाकाल गरम जल से नहाते हैं. मंदिर में नियमित होने वाली भस्म आरती, दद्योदक व भोग आरती में पंचामृत पूजन के पश्चात राजाधिराज को ठंड न लगे, इसलिए पंडे-पुजारी गरम जल चढ़ाकर स्रान कराते हैं. ठंड के दिनों में यह व्यवस्था कार्तिक मास से शुरू होकर चार महीने निरंतर चलती है. यहीं नहीं शिव की दिनचर्या में भी बदलाव हो जाता है. भोग आरती आधे घंटे देरी से शुरू होती है. यानी ठंड में बाबा महाकाल देर से भोजन करते हैं. ठंडक को देखते हुए आरतियों के समय में आधे घंटे का परिवर्तन हो जाता है. नियमित श्रद्धालु परिवर्तित समय अनुसार ही दर्शन के लिए आते हैं.
साल में 2 बार बदलती है व्यवस्था-साल में दो बार शीत व ग्रीष्म ऋतु परिवर्तन के समय भगवान की दिनचर्या बदलती है. चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से आश्विन शुक्ल पूर्णिमा व कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तक व्यवस्थाएं चलती हैं. ऋतु के अनुसार पुजारी बाबा की सेवा करते हैं.
ठंड के दिनों में बादाम का हलवा-ठंड के दिनों में भगवान को नियमित रूप से भोग में गरम सामग्री परोसी जाती है. भोग की थाली में रोटी, नमकीन भजिए के साथ मीठे में बादाम व कई तरह के हलवे और मौसमी सब्जियों में खासकर मैथी की सब्जी परोसी जाती है.

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One response to “ठंड में गरम जल से नहाते हैं महाकाल!”

  1. Khilesh says :

    मै गया था महाकालेश्वर । भस्क आरती के वक्त अंदर था । बहोत अच्छा लगता है ।

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