गांधी से सीखें

अन्ना हजारे ने इस बार अपना अनशन बीच में ही खत्म करने का ऐलान कर दिया, इतना ही नहीं उन्होंने जेल भरो आंदोलन को भी फिलहाल स्थगित कर दिया… इसके कई मायने निकाले जा सकते हैं. अन्ना के इस फैसले में उनकी सेहत का खराब होना मुख्य वजह है, क्योंकि डॉक्टरों ने भी उन्हें अनशन करने से मना किया था, लेकिन इस आंदोलन को बीच में रोकने के पीछे कहीं ना कहीं अपेक्षित जनसमर्थन ना मिलना भी एक कारण रहा होगा. ये आंदोलन न सिर्फ व्यवस्था के विरुद्ध था बल्कि किसी एक पार्टी के खिलाफ खड़ा होता जा रहा था शायद उससे नुकसान हुआ हो.
गांधी से सीखें
अन्ना हजारे को गांधी जी से कुछ सीखना चाहिए, गांधी जी ने जब भी किसी नए मुद्दे को उठाया उसमें सांकेतिक विजय मिलने के साथ ही एक नई जमीन की तलाश की… कभी भी किसी आंदोलन को उसकी अंतिम परिणति तक घसीटा नहीं, अपने आपको उससे दो इंच अलग करके रखा. जब तक अन्ना का आंदोलन इस तरफ नहीं बढ़ेगा तब तक वे स्थापित राजनीति के स्थापित दांव पेंच और फिसलन भरी जमीन पर रहेगा जिसमें गिरने और चोट खाने की गुंजाइश काफी ज्यादा है.

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