हम आम तुम खास

नगर पालिका निगम के अधिकारी-कर्मचारी, तहसीलदार, आर आई, पुलिस दल, पार्षद और उनका अमला इन दिनों जब कड़ाके की ठंड पड़ रही है तब सुबह 5 बजे जब घर के बुजुर्ग भी सिर्फ खांसने के लिए मुंह कंबल से बाहर निकालते हैं, ये सभी मिलकर इंच-टेप से लोगों के घरों को नापते और बुलडोजर चला रहे हैं. बुलडोजर की आवाज से लोगों की मीठी नींद टूट रही है और जब वे अपने कमरे से बाहर निकल रहे हैं तो उन्हें अपने ही धर का एक बड़ा हिस्सा जमीदोज मिल रहा है. नया साल आने से पहले नगर पालिका निगम सड़क चौड़ीकरण के नाम पर यह कार्यवाही कर रहा है. और उनके घरों को पहले तोड़ रहा है जो मुआवजा नहीं मिलने की दशा में कोर्ट से स्टे आर्डर लेकर आये हैं. कल ही 5 बजे से 8 बजे के बीच ये सभी अमला जो कभी भी समय पर दफ्तर नहीं पहुंचता बड़ी मुस्तैदी से तोड़-फोड़ में लगा हुआ है.
प्रश्न-1. रसूखदारों से हमदर्दी- राजीव गांधी कॉम्पलेक्स, रवि भवन का पार्किंग, जयराम कॉम्पलेक्स का पार्किंग, होटल आदित्य, एमएमआई अस्पताल, नारायण अस्पताल, मिलेनियम व कापसे भवन, कृष्णा कॉम्पलेक्स जिन्हें सिर्फ नोटिस थमाई गयी है, पर कार्यवाही आज की तारिख में नहीं की गई है, क्यों?
2. क्यों नहीं होती कार्यवाही-सदर बाजार, सत्ती बाजार, शास्त्री बाजार, मालवीय रोड, गुड़ियारी, चिकनी मंदिर गली ये कुछ ऐसी जगहें हैं जहां कभी भी कार्यवाही नहीं की जाती, क्यों?
3. हम कहीं के नहीं रहे-तेलीबांधा का पेट्रोल पम्प, जिसके कागजात आज की तारीख में उस सैनिक को नहीं मिले, जबकि उसे सरकार ने खुद रिटायर होने के बाद पेट्रोल पम्प डालने की परमिशन दी है. आज वह परेशान होकर किसी अन्य को बेच दिए हैं. अब जिसने इसे खरीद कर वहां अपना शो-रूम डाला है, उससे कहा जा रहा है कि आप रूपये दे दो, नगर पालिका निगम मेरे शासनकाल तक वहां हाथ नहीं डालेगी. बेचारे ने रूपये भी दिए, पर विदेश जाते-जाते इस  पर कार्यवाही के आदेश दे दिए गये. ऐसा क्यों, कुछ तो इमानदारी दिखानी थी?
4. क्या कर लोगे-कुछ ऐसे भी लोग हैं, जो किसी भी पार्टी का शासन हो उनका कोई कुछ बिगाड़ नहीं सकता. वे भाई, दादा, बड़े भैय्या के नाम से जाने जाते हैं. इनके अवैध कब्जे क्यों नहीं तोड़े जाते?
5. नाली में व्यवसाय- शहर की नालियां बंद कर व्यवसाय चलाने वालों की कमी नहीं है. वे इन बंद नालियों में शराब से लेकर कच्चे नारियल तक को छिपा कर रखते हैं और जब ड्राय दिवस होता है उस दिन यहीं से शराब की बोतलें निकाल कर मनमानी कीमतों में बेचते है. राजकुमार कालेज के सामने एक भाई रहते हैं, जो आंध्र से आये व्यवसायियों के कच्चे नारियल को इन नालियों में रखते हैं और बकायदा महिना वसुलते हैं. खास बात यह की इन्हीं के कारण पिछले 20 वर्षों से नालियों का निर्माण नहीं हो रहा है. इस बीच भाजपा महापौर आये अब कांग्रेसी महापौर है, पर इस लाइन के हर घर के एक इंच में भी यदि गमला रखा रह गया, तो उसे तोड़ते हुए  अवैध कब्जा हटाओ अमला आगे बढ़ गया. क्या ऐसे गुण्डों को जो जन सुविधा पर डाका डालते हैं, उन पर कार्यवाही क्यों नहीं होती?

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