ससुराल गेंदा फूल… के आशियाने को रौंदा

सास गारी देवे, ननद चुटकी लेवे…ससुराल गेंदा फूल … यह गाना जैसे ही  बॉलीवुड की एक फिल्म में आया, लोगों की जुबा पर चढ़ गया. क्या बॉलीवुड हस्तियां क्या टीवी कलाकार लगभग सभी ने इस गाने पर ढुमके लगाये. तब छत्तीसगढ़ का नाम सुर्खियों में आया और लोगों ने जोशी बहनों को पहचानना शुरू किया. ये वही बहनें हैं, जिनकी आवाज में यह गाना हम सुनते हैं और पसंद करते हैं. छत्तीसगढ़ में तो यह गाना इतना लोकप्रिय हुआ कि लोगों ने अपने मोबाइल का कॉलर ट्यून की तरह सहेज कर रखा. मेरे मोबाइल में आज भी यह कॉलर ट्यून है.
जोशी बहनें डा. रेखा, प्रभा और शीला जोशी लोक गीत के लिए समर्पित हैं. इनके पिता स्वर्गीय विष्णुदत्त जोशी ने सन् 1960 में डंगनिया में अपना आशियाना बनाया. यह वही घर है, जहां राज्य भर के कलाकार साधना करने आते हैं और इस घर के एक हिस्से में यह बहनें रहती हैं जबकि घर के बाकि हिस्से को राज्य भर के कलाकारों के रियाज तथा ठहरने का ठिकाना बनाया गया है. ये वही विष्णुदत्त जोशी हैं जिनके लिखे गीत चोला माटी के राम… ने लोगों के दिलों में घर बना लिया. इन कला को समर्पित बहनों के घर को निगम के दस्ते ने ढहा दिया. कला की साधना के मंदिर के ढहाये जाने पर किसी का मन नहीं पसीजा.
इस परिवार के रमादत्त जोशी का कहना है कि हमने निगम कार्यालय में घर के सभी दस्तावेज दमा कराये थे, पर मुंह अंधेरे यह दस्ता आया और हमारे मंदिर को तहस-नहस कर चला गया. इन बहनों का आत्मविश्वास अभी भी डगमगाया नहीं है- वे कहती हैं तोड़फोड़ के बाद बची जगह पर फिर तिनका-तिनका जोड़ कर कलाकारों के लिए आशियाना खड़ा करेंगे. शाबाश जोशी बहनें. हमें आप पर नाज है, पर दुख इस बात का है कि अब तक किसी नेता ने इन बहनों की सुध नहीं ली है.
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