नए साल में करंट

विद्युत के मामले में सरप्लस छत्तीसगढ़ के रहवासियों को नए साल में बिजली जोर का झटका देने वाली है. दुखद पहलु यह है कि किसानों को 5 एचपी के पम्प कनेक्शन को साल में 6 हजार यूनिट मुफ्त देने का ढ़िढ़ोरा पिटने वाली प्रदेश सरकार किसानों को भी राहत नहीं दे रही है. 8 माह पहले ही (अप्रैल) यहां विद्युत की नई दर लागू की गई है. तब औसतन 14 फीसदी की वृध्दि की गई थी, जिसमें 22 फीसदी घरेलु और 13 फीसदी गैर घरेलु श्रेणी में बढ़ोत्तरी की गई थी.
एक तरफ प्रदेश सरकार अपनी प्रगति और विकास की गाथा कहती है, तो दूसरी तरफ आम व्यक्ति से लेकर उद्योगपतियों और किसानों को बर्बाद करने पर तूली हुई है. अनेक उद्योगपति छत्तीसगढ़ में इसीलिए उद्योग लगाने से कतराते हैं. इसी का परिणाम है कि अनेक स्टील उद्योगपति अपनी फैक्ट्री के शटर डाउन करने मजबूर हो रहे हैं.
एक तरफ विद्युत मंडल अनेक बड़ी हस्तियों से विद्युत की वसूली नहीं कर पा रहा है और जो पूरी इमानदारी से प्रति माह बिजली बिल का भुगतान कर रहे हैं, उन पर ही गाज गिराने की तैयारी पूर्ण हो गई है. इस प्रदेश के किसान नहर-नाली के अभाव में एक फसली उपज ले रे हैं, उन्हें सुविधाएं तो मुहैया नहीं करायी जा रही है उपर से विद्युत बिल अनाप-शनाप बढ़ाया जा रहा है. किसान इससे हैरान-परेशान हो आत्महत्या करने मजबूर हो रहे हैं, तो आम नागरिक दो पाटन के बीच पीस रहा है. अवैध कनेक्शन और विद्युत की चोरी करने वालों पर विद्युत विभाग की नीति चौपट है. हमारे सुस्त कृषि मंत्री चन्द्र शेखर साहू किसानों की हित की बात कर लड़ाई लड़ने की बात कह रहे हैं, वे इस दिशा में कुछ नहीं कर पायेंगे. वे सिर्फ बयान दे रहे है क्योंकि उनकी अपने विभाग में सही पकड़ नहीं है.

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