नीदरलैंड भी पीक से परेशान

भारत के किसी भी शहर, गांव या कसबे में आप चले जाएं लोगों को जहां-तहां पान और गुटखे की पीक मारते देख सकते हैं. घर हो या आफिस हर जगह ये गंदगी दिख जाएगी. कई दीवारें तो ऐसी रंगी हुई होती हैं, मानो मार्डन आर्ट किया गया हो. हमारी तरह नीदरलैंडवासी भी पान की तरह के एक खाद्य पदार्थ ‘‘खाट’’ से सार्वजनिक जगहों पर हो रही गंदगी से परेशान हैं. खाट हरी पत्तियों के रुप में पाया जाने वाला एक हल्का नशीला पदार्थ है, जिसे चबाने पर पत्तियों से निकलने वाला रस मादक होता है. नीदरलैंड में पारंपरिक रुप से मादक पदार्थों के इस्तेमाल पर कोई खास रोकटोक नहीं लेकिन खाट की पीक से होने वाली गंदगी, इसे खाने के बाद हल्के सुरूर के चलते हुड़दंग करते लोगों और इसके चिकित्सीय नुकसान को देखते हुए सरकार ने इस पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है. बड़ी संख्या में सोमालिया, इथियोपिया, कीनिया और यमन से आए लोग खाट के शौकीन हैं. ये लोग नीदरलैंड की मेहनतकश जनसंख्या का हिस्सा हैं और आमतौर पर दिहाड़ी मजÞदूर, टैक्सी ड्राइवर या खेतों में काम करने वाले श्रमिक हैं. भारत में भी खाट की तरह पान, खैनी और गुटखे जैसे मादक पदार्थों से निकलने वाली पीक सरकारी दफ्तरों, सड़कों और शौचालयों के आसपास गंदगी की जड़ है.

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