Archive | मार्च 2012

आग लगे बस्ती में

शादी में तो आए हैं भय्या पर क्या करें नींद  ऐसी है कि रोके नहीं रूक रही है. उस पर अच्छी खासी दरी बिछी हुई है, तो क्यों ना झपकी ले ली जाए, क्यों इसमें कोई बुराई है क्या?

गति पर रोक

रायपुर के महादेव घाट से लेकर लाखे नगर तक तेज वाहनों की गति में विराम लगाने इस इलाके के लोगों खास महिलाओं ने मोर्चा संभाल कर रखा है. कार्य सराहनीय है, पर एक बात मेरी समझ में नहीं आयी कि  आयल कंपनियां यह प्रचार करती हैं कि सिग्नल में गाड़ी रोक कर रखे और वाहन की गति 40 से 45 के बीच रखें तो 20 प्रतिशत की बचत कर सकते हैं ऐसे में यदि  महादेव घाट से लेकर लाखे नगर के बीच कोई वाहन चालक 45 की गति से वाहन चलाए और इनके लपेटे में आ जाए तो…..

गोबर दे बछरू गोबर दे

आप प्रगति  के पथ पर अग्रसर हो जाए. कम्प्यूटर, मोबाइल  और ना जाने कितने आधुनिक उपकरणों के प्रयोग से खुद को एडवांस टेक्नोलाजी से सुसज्जित  कर लें. घरों में माइक्रो ओवन ले आयें. वह ना सहीं गैस से खाना बना लें पर आज भी  गांव में या जिन शहरी घरों में गाय-भैंस हैं वहां गोबर के कंड़े बनाए जाते हैं. अपने आप में मग्न यह महिला बड़े इतमीनान से नहर जहां अभी सिंचाई के लिए पानी नहीं छोड़ा गया है, कड़े बना कर सुखा रही है.

कुछ मीठा हो जाए

भाजपाईयों ने अवसर अच्छा तलाशा था, पर कुछ मीठा हो जाए ने सभी के मुंह में पानी ला दिया. ना-नुकूर करने के बाद  वे भी महापौर को जन्मदिन की बधाई देते हुए लड्डू पर टूट पड़े. भाजपाईयों ने (खास भाजपा पार्षदों ने ) रायपुर शहर की समस्याओं को लेकर प्रमुख मार्गों में जुलूस निकाला. नपा कार्यालय पहुंच अंदर प्रवेश के लिए  पुलिस से उलझने लगे. चिलचिलाती धूप में पसीने से खुद को तर-बतर किया, पर प्रमुख नेताओं ने जब महापौर के समक्ष अपनी बातें रखी, तो जवाब हाजिर था. बिना तैयारी किये आनन-फानन में लिए निर्णय का जो हमेशा से होता है, वही हुआ. उस पर महापौर ने  जो अपनापन दिखाया और लड्डुओं के साथ स्वागत किया तो ..मन ललचाए रहा ना जाए…. होली से पहले सभी ने गिले शिकवे भुला कर एक हो गए.

बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना

खुशी का मौका हो और पांव ना थिरके कैसे हो सकता है. अब शादी किसी की भी हो जब वहां पहुंचे हैं तो नेग करना ही पड़ेगा.

टूट पड़ो

शादी के दौरान मिलने वाला भोजन लजीज होता है. लोग छक कर खाते हैं. जब हमें वर-वधु को कुछ भी ना देना हो तो वह भोजन और भी स्वादिष्ट लगता है. राज्य सरकार ने सामुहिक शादी का आयोजन किया तो क्या घराती क्या बराती सभी ने यह सोच कर भीड़ इक्टठी कर ली कि यदि भोजन नहीं बचा तो, क्या खाली पेट शादी से लौटेंगे.