Archive | अप्रैल 2012

कौन दिशा में ले के चला रे………

कौन दिशा में ले के चला रे………

क्या है एनसीटीसी?

 राष्टÑीय आतंकवाद निरोधक केंद्र यानि एनसीटीसी गृह मंत्रालय की एक महात्वाकांक्षी परियोजना है, जो गृह मंत्री पी चिदंबरम की पहल पर गठित हुई है. एक मार्च से इसे अस्तित्व में आना था. आतंकवाद से जुड़े मामलों के लिए ये सेंटर, इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी), रिसर्च एंड एनलिसिस विंग (रॉ), ज्वायंट इंटेलिजेंस कमेटी और राज्यों की खुफिया एजेंसियों के लिए नोडल एजेंसी का काम करेगा. ये सारी एजेंसियां आतंकवाद से जुड़े मामलों में नेशनल काउंटर टेरररिज्म सेंटर को रिपोर्ट करेंगी. एनसीटीसी यानी नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर खुफिया एजेंसियों और नैशनल इनवेस्टिगेटिंग एजेंसी (एनआईए) के सहयोग से काम करते हुए आतंकवाद से जुड़े मामलों की जांच करेगा. जांच के दौरान जानकारियां इकट्ठा करने के लिए इसे दूसरी एजेंसियों पर निर्भर रहना होगा क्योंकि इसके लिए इस सेंटर के पास कोई स्टाफ नहीं होगा. एडीजी स्तर का पुलिस अफसर इस सेंटर का प्रमुख होगा जो सीधे गृह मंत्रालय को रिपोर्ट करेगा. ये सुर्खियों में क्यों है ? कुछ राज्यों के मुख्यमंत्री जैसे बंगाल की ममता बनर्जी, तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक इसका विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि यह देश के संघीय ढांचे के विरुद्ध है. जबकि गृहमंत्री पी. चिदंबरम का कहना है कि एनसीटीसी पूरी तरह जरूरी है और यह संघीय ढांचे पर हमला नहीं है. उनका कहना है कि कुछ राज्य एनसीटीसी के कुछ प्रावधानों का विरोध कर रहे हैं लेकिन वे इसके गठन का समर्थन करते हैं. अगर ये बन जाता है तो पहली बार भारत के संदर्भ में ऐसी व्यस्था होगी जो केंद्र के स्तर पर चरमपंथ, संगठित अपराध और माओवादी गतिविधियों की रोकथाम के लिए सहायक होगी. अब तक कानून व्यवस्था राज्य का विषय है. इसके बाद केंद्रीय स्तर पर सीधे इन आपराधिक गतिविधियों से निपटा जा सकेगा.